पटना, बिहार। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के माध्यम से नियुक्त कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को बिहार के शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी से शिष्टाचार भेंट कर राज्य में कंप्यूटर शिक्षा की वर्तमान स्थिति एवं उससे जुड़ी विभिन्न समस्याओं और संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव और मांगें रखीं, जिनका उद्देश्य राज्य के विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक एवं रोजगारोन्मुख बनाना है।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार कंप्यूटर साइंस टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन (BCSTA) के प्रदेश सचिव श्रीपति झा ने किया। प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री को एक ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर विज्ञान विषय को अनिवार्य विषय के रूप में लागू किया जाए तथा बोर्ड परीक्षाओं में इसके अंकों को समुचित महत्व दिया जाए। उनका मानना है कि इससे विद्यार्थियों में तकनीकी शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ेगी और वे विद्यालय स्तर से ही आधुनिक डिजिटल कौशल अर्जित कर सकेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री को बताया कि आज के समय में कंप्यूटर शिक्षा केवल एक अतिरिक्त विषय नहीं, बल्कि भविष्य के रोजगार और आत्मनिर्भरता का आधार बन चुकी है। प्रोग्रामिंग, वेब डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डिजिटल उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए अपार संभावनाएं हैं। यदि विद्यालय स्तर पर छात्रों को इन विषयों का गुणवत्तापूर्ण ज्ञान दिया जाए, तो वे आगे चलकर उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
बैठक के दौरान शिक्षकों ने यह भी अवगत कराया कि BPSC द्वारा नियुक्त कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक तकनीकी रूप से दक्ष हैं और उनमें से कई शिक्षकों को आईटी एवं सॉफ्टवेयर सेक्टर में कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त है। ऐसे में उनकी विशेषज्ञता का उपयोग राज्य के विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए।
एक महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में प्रतिनिधिमंडल ने यह भी रखा कि कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति के समय बी.एड. (B.Ed.) योग्यता अनिवार्य नहीं थी, जिसके कारण वर्तमान में अनेक शिक्षक प्रधानाध्यापक भर्ती, विभागीय परीक्षाओं एवं पदोन्नति की विभिन्न प्रक्रियाओं में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए संगठन ने राज्य सरकार से विशेष ब्रिज कोर्स (Bridge Course) संचालित करने का अनुरोध किया, ताकि निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों को भी अन्य शिक्षकों के समान अवसर प्राप्त हो सकें।
शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और कंप्यूटर शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए इस दिशा में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक का ज्ञान प्रत्येक विद्यार्थी के लिए आवश्यक है और सरकार गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
प्रतिनिधिमंडल ने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार द्वारा कंप्यूटर विज्ञान विषय को अधिक महत्व देने और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। यदि विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य एवं व्यावहारिक स्वरूप दिया जाता है, तो इससे न केवल विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बिहार डिजिटल शिक्षा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी एक नई पहचान स्थापित कर सकेगा।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में विद्यासागर, सविनय कुमार, रवि कुमार, जय तिवारी, सुधीर सिंह, पूजा झा, संजीव कुमार सत्संगी, तनु श्रीवास्तव एवं पंकज कुमार सहित कई कंप्यूटर विज्ञान शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में राज्य में कंप्यूटर शिक्षा के विस्तार और कंप्यूटर विज्ञान शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।